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आज कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर जी महाराज ससंघ ने 7,000 से अधिक विद्यार्थियों को अपने ओजस्वी प्रवचनों से संबोधित किया।
श्री सिद्धगंगा मठ सदियों से निःस्वार्थ सेवा, शिक्षा और संस्कार का अद्भुत केंद्र रहा है, जहाँ हजारों जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, भोजन और आवास उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे पावन वातावरण में पूज्य गुरुदेव ने विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि धर्ममय जीवन को जीवनभर अपनाने का संदेश दिया।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि—
“शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार हों, और संस्कार तभी स्थायी बनते हैं जब जीवन में धर्म का आधार हो।”
उन्होंने बच्चों को सत्य, अहिंसा, करुणा, अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों के प्रति सम्मान, संयम और सदाचार को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा दी। गुरुदेव ने बताया कि बचपन में बोए गए अच्छे संस्कार ही भविष्य में महान व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
सभी विद्यार्थियों ने अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ गुरुदेव के मंगल वचनों को सुना तथा धर्ममय, चरित्रवान और राष्ट्रहितकारी जीवन जीने का संकल्प लिया।
धर्मयुक्त शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य का सच्चा आधार है।